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भारत में क्यों वाहनों की लाइट अब दिन में जलती रहती है?

भारत में क्यों अब वाहनों की हेड लाइट दिन में भी जलती रहती है, क्या इससे कोई फायदा है?

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भारत में क्यों वाहनों की लाइट अब दिन में जलती रहती है? सड़क एवं परिवहन मन्त्री नितिन गडकरी ने अपने मंत्रलाय की वार्षिक रिपोर्ट में भारत में सड़क दुर्घटनाएं २०१६ की रिपोर्ट जारी की थी| इस रिपोर्ट में कहा कहा गया है कि वर्ष २०१५ में भारत में ५,०१,४२३ सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं जबकि २०१६ में देश में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग ४०१% की कमी आई है, अर्थात अब सड़क दुर्घटनाओं की संख्या ४,८०,६५२ पर आ गयी है| भारत में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या जो कि २०१६ में ७९,३५४ थी वह जनवरी से जुलाई २०१७ की अवधि में घटकर ७५,५८३ पर आ गयी है|

यदि वाहनों के हिसाब से देखा जाये तो भारत में सबसे अधिक दुर्घटना ३३.८% बाइक या दुपहिया वाहन चालकों की होती है इसके बाद कार, जीप और टैक्सी २३.६%  ट्रक, टेम्पो, ट्रैक्टर और अन्य वाहन २१% दुर्घटना ग्रस्त होते हैं| इन सभी सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मरने वालों की संख्या लगभग ३५% दुपहिया वाहन चालकों की होती है|

इसलिए सरकार ने इन सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी करने के लिए सभी मुमकिन उपाय उठाने शुरू कर दिए हैं| इन्हीं उपायों में एक उपाय है दिन में वाहनों की हेडलाइट जलाना हो सकता है| इसलिए वाहन चालक इसे चाहकर भी बंद नहीं कर पाएंगे| अब हेडलाइट ऑन-ऑफ स्विच की जगह अब सभी दोपहिया वाहनों में आटोमैटिक हेड लाइट सिस्टम होगा|

दिन में लाइट जलाने का सबसे बड़ा फायदा उस समय होगा जब धूल, बरसात, घने कोहरा और भारी ट्रैफिक में वाहन चालक दूसरे वाहनों को पाएंगे| इसके अलावा सामान्य मौसम में भी जब सामने से आ रहे वाहन की लाइट चमकती है तो सामनेवाला चालक सतर्क हो जाता है जिससे दुर्घटना की संभावना कम हो जाती है|

गाड़ियों में दिन में हेडलाइट जलाने का नियम यूरोपीय देशों में पहले से ही लागू है जिसके कारण वहां पर वाहन दुर्घटनाएं कम होतीं हैं| जेसेकी इटली, हंगरी, रोमानिया, बुल्गारिया, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, कोसोवो, लातविया, लिथुआनिया, मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो, पोलैंड, और कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन में भी लागू है|

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