शिक्षा

स्वामी दयानंद सरस्वती चाहते थे की कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक भाषा

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे देश की एक भाषा की इच्छा थी आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती

Swami Dayanand SaraswatiSwami Dayanand Saraswati
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आर्य समाज के संस्थापक और भारत के महान चिंतक स्वामी दयानंद सरस्वती इच्छा थी पूरे भारत देश उतर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक की एक भाषा होनी चाहिए|

आर्य समाज के संस्थापक और भारत के महान चिंतक स्वामी दयानंद सरस्वती की आज पुण्यतिथि है| स्वामी दयानंद का नाम मूलशंकर था. उनका जन्म १२ फरवरी १८२४ को गुजरात के एक छोटे से गाँव टंकारा में हुआ था| स्वामी दयानंद सरस्वती ने बाल विवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियों को दूर करने में अपना खास योगदान दिया है| स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों को सर्वोच्च माना और वेदों का प्रमाण देते हुए हिंदू समाज में फैली कुरीतियों का विरोध किया| वे हिंदी भाषा के प्रचारक थे|

स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपने महाग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में सभी मतों में व्याप्त बुराइयों का खण्डन किया है| स्वामी दयानंद सरस्वती ने सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि ईसाई और इस्लाम धर्म में फैली बुराइयों का कड़ा खण्डन किया| स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने अपने उपदेशों के जरिए युवाओं में देश प्रेम और देश की स्वतंत्रता के लिए मर मिटने की भावना पैदा करते थे| स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों का प्रचार करने और उनकी महत्ता लोगों को समझाने के लिए पूरे देश का दौरा किया| स्वामी दयानंद सरस्वती ने ‘स्वराज’  का नारा दिया था, जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया|

Chaaroo
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