धर्म

शिव पंचाक्षर स्तोत्र

श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र

Lord Shivji
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शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिव की महत्ता को ‘शिवसागर’ में और ज्यादा विस्तृत रूप में देखा जा सकता है| शिवसागर में बताया गया है कि विविध शक्तियां, विष्णु व ब्रह्मा, जिसके कारण देवी और देवता के रूप में विराजमान हैं, जिसके कारण जगत का अस्तित्व है, जो यंत्र हैं, मंत्र हैं, ऐसे तंत्र के रूप में विराजमान भगवान शिव को नमस्कार है|

जिनके तीनों नेत्रों से उत्सर्जित होने वाली तीन अग्नि जीव मात्र का शरीर पोषण करती हैं, जिनके त्रैराशिक तत्वों से जगत को त्रिरूप यानी आकार, प्रकार और विकार प्राप्त होता है, जिनका त्रिविग्रह त्रिलोक को त्रिविध रूप से नष्ट करता है, ऐसे त्रिवेद रूपी भगवान शिव मधुमास पूर्वा प्रदोषपरा त्रयोदशी तिथि को प्रसन्न हों|

श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे “न” काराय नमः शिवायः॥

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे “म” काराय नमः शिवायः॥

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै “शि” काराय नमः शिवायः॥

वषिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय।

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै “व” काराय नमः शिवायः॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय।

दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै “य” काराय नमः शिवायः॥

पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत् शिव सन्निधौ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

॥ इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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