व्यापार

आरबीआई विवाद

सरकार ने पहली बार धारा ७ का इस्तेमाल किया

RBIRBI
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अंतर-मंत्रालय समिति ने अलग पेमेंट-सेटलमेंट रेगुलेटर की सिफारिश की है। रिजर्व बैंक इसके खिलाफ है। रिजर्व बैंक ने १२ बैंकों को त्वरित कारवाई की श्रेणी में डाला है। ये नया कर्ज नहीं दे सकते, नई ब्रांच नहीं खोल सकते और ना ही डिविडेंड दे सकते हैं। सरकार ने अगर एक विशेष कानूनी धारा का इस्तेमाल करते हुए रिजर्व बैंक को कोई दिशा-निर्देश जारी किए तो गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं। यह आरबीआई एक्ट की धारा ७ है, जिसके तहत सरकार ने पहली बार तीन पत्र रिजर्व बैंक को भेजे हैं। अधिकारी गवर्नर उर्जित पटेल को इस विवाद के लिए जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि पटेल को सितंबर २०१९  के बाद कार्यकाल में विस्तार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इन मुद्दों पर सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने रिजर्व बैंक की स्वायत्तता के मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा था कि साल २००८  से २०१४ के बीच बैंकों ने मनमाने तरीके से लोन बांटे।

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