त्यौहार

निर्जला एकादशी २०१९

शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि के साथ जानिए इसका महत्व

Nirjala Ekadashi
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निर्जला एकादशी २०१९, शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि के साथ जानिए इसका महत्व, साथ ही बन रहा है शुभ संयोग खुल जाएंगे बंद किस्मत| पूरे साल की 24 एकादशियों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसे भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। निर्जला एकादशी में जल पीना मना है। सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन के सूर्योदय तक जल का त्याग करना चाहिए। ज्येष्ठ माह के शुक्लपक्ष की एकादशी को अपर और निर्जला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

यह व्रत जीवन में सर्व समृद्धि देने वाला माना गया है। इस दिन लोग निर्जल व्रत रखकर विधि-विधान से दान करते हैं। इसलिए निर्जला एकादशी के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पण करना चाहिए। भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र, फल और अनाज अर्पित करना चाहिए। कहते हैं जो व्यक्ति साल की सभी एकादशियों पर व्रत नहीं कर सकता, वो इस एकादशी के दिन व्रत करके बाकी एकादशियों का लाभ भी उठा सकता है।

वेदव्यास ने भीम से कहा कि पूरे वर्ष में सिर्फ एक एकादशी ऐसी है जो वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य दिला सकती है। भीम तुम इस एकादशी का व्रत करो। इसके बाद भीम निर्जला एकादशी का व्रत करने के लिए तैयार गए। इसीलिए इसे पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी के दौरान भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। सुबह व्रत की शुरुआत पवित्र नदियों में स्नान करके किया जाता है।

निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ: १२ जून शाम ०६:२७

एकादशी तिथि समाप्‍त: १३ जून ०४:४९

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