त्यौहार

महाशिवरात्रि पूजा

शिवरात्रि पूजा

God Shiv
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महाशिवरात्रि पूजा, शिव की पूजा किस तरह से की जाती है| महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा से भक्तों दुःख दूर होते है| सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र,  धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें| अगर घर के आस-पास में शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी उसे पूजा जा सकता है|

इस दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए| रात्रि को जागरण कर शिवपुराण का पाठ सुनना हरेक व्रती का धर्म माना गया है| इसके बाद अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है.

महाशिवरात्रि भगवान शंकर का सबसे पवित्र दिन है| यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है| इस व्रत को करने से सब पापों का नाश हो जाता है| हिंसक प्रवृत्ति बदल जाती है| निरीह जीवों के प्रति आपके मन में दया भाव उपजता है| महाशिवरात्रि को दिन-रात पूजा का विधान है| शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है| साथ ही चार पहर रात्रि में वेदमंत्र संहिता, रुद्राष्टा ध्यायी पाठ ब्राह्मणों के मुख से सुनना चाहिए|

सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व में पूजन-आरती की तैयारी कर लेनी चाहिए| सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति कीर्तन के साथ महाशिव रात्रि का पूजन संपन्न होता है|शास्त्रों के अनुसार, शिव को महादेव इसलिए कहा गया है कि वे देवता, दैत्य, मनुष्य, नाग, किन्नर, गंधर्व पशु-पक्षी व समस्त वनस्पति जगत के भी स्वामी हैं|

शिव का एक अर्थ कल्याणकारी भी है. शिव की अराधना से संपूर्ण सृष्टि में अनुशासन, समन्वय और प्रेम भक्ति का संचार होने लगता है| इसीलिए, स्तुति गान कहता है की मैं आपकी अनंत शक्ति को भला क्या समझ सकता हूं| अर्थात हे शिव, आप जिस रूप में भी हों उसी रूप को मेरा आपको प्रणाम|

‘शिव’ शब्द का अर्थ है ‘कल्याण करने वाला’. शिव ही शंकर हैं| शिव के ‘शं’ का अर्थ है कल्याण और ‘कर’ का अर्थ है करने वाला| शिव, अद्वैत, कल्याण- ये सारे शब्द एक ही अर्थ के बोधक हैं| शिव ही ब्रह्मा हैं, ब्रह्मा ही शिव हैं| ब्रह्मा जगत के जन्मादि के कारण हैं|

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