त्यौहार

महाशिवरात्रि कथा

शिव की कथा

Bhagwan Shiv
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महाशिवरात्रि के दिन शिवभक्त बड़े धूमधाम से शिव की पूजा करते हैं| भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर बेल पत्र आदि चढ़ाकर पूजन करते हैं| साथ ही लोग उपवास तथा रात को जागरण करते हैं| शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाना, उपवास तथा रात्रि जागरण करना एक विशेष कर्म की ओर इशारा करता है| यह माना जाता है कि इस दिन शिव का विवाह हुआ था, इसलिए रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है|

शिवरात्रि के पर्व पर जागरण का विशेष महत्व है| पौराणिक कथा है कि एक बार पार्वतीजी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, ‘ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?’  उत्तर में शिवजी ने पार्वती को ‘शिवरात्रि’ के व्रत का उपाय बताया|

चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं| अत: ज्योतिष शास्त्रों में इसे परम शुभफलदायी कहा गया है. वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में आती है| परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है| ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव भी इस समय तक उत्तरायण में आ चुके होते हैं तथा ऋतु परिवर्तन का यह समय अत्यन्त शुभ कहा गया है| शिव का अर्थ है कल्याण. शिव सबका कल्याण करने वाले हैं| अत: महाशिवरात्रि पर सरल उपाय करने से ही इच्छित सुख की प्राप्ति होती है|

एक कथा यह भी बताती है कि महाशिवरात्रि शिव की प्रिय तिथि है, इसलिए प्राय: ज्योतिषी शिवरात्रि को शिव अराधना कर कष्टों से मुक्ति पाने का सुझाव देते हैं| शिव आदि-अनादि है| सृष्टि के विनाश और पुन:स्थापन के बीच की कड़ी हैं| ज्योतिष में शिव को सुखों का आधार मान कर महाशिवरात्रि पर अनेक प्रकार के अनुष्ठान करने की महत्ता कही गई है|

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