त्यौहार

महाशिवरात्रि पर क्या करें भोजन

शिव का उपवास पर क्या भोजन आरोगे

Bhagwan Shiv Shankar
223

महाशिवरात्रि पर क्या करें भोजन, शिव का उपवास पर क्या भोजन आरोगे, भगवान शंकर पर चढ़ाया गया नैवेद्य खाना निषिद्ध है| ऐसी मान्यता है कि जो इस नैवेद्य को खाता है, वह नरक के दुखों का भोग करता है| इस कष्ट के निवारण के लिए शिव की मूर्ति के पास शालिग्राम की मूर्ति का रहना अनिवार्य है| यदि शिव की मूर्ति के पास शालीग्राम हो, तो नैवेद्य खाने का कोई दोष नहीं है|

व्रत के व्यंजनों में सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं और लाल मिर्च की जगह काली मिर्च का प्रयोग करते हैं| कुछ लोग व्रत में मूंगफली का उपयोग भी नहीं करते हैं| ऐसी स्थिति में आप मूंगफली को सामग्री में से हटा सकते हैं| व्रत में यदि कुछ नमकीन खाने की इच्छा हो, तो आप सिंघाड़े या कुट्टू के आटे के पकौड़े बना सकते हैं|

गरुड़, स्कंद, अग्नि, शिव तथा पद्म पुराणों में महाशिवरात्रि का वर्णन मिलता है| यद्यपि सर्वत्र एक ही प्रकार की कथा नहीं है, परंतु सभी कथाओं की रूपरेखा लगभग एक समान है| सभी जगह इस पर्व के महत्व को रेखांकित किया गया है और यह बताया गया है कि इस दिन व्रत-उपवास रखकर बेलपत्र से शिव की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए|

इस दिन साबूदाना भी खाया जाता है| साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट की प्रमुखता होती है और इसमें कुछ मात्रा में कैल्शियम व विटामिन सी भी होता है| इसका उपयोग अधिकतर पापड़, खीर और खिचड़ी बनाने में होता है| व्रतधारी इसका खीर अथवा खिचड़ी बना कर उपयोग कर सकते हैं. साबूदाना दो तरह के होते हैं एक बड़े और एक सामान्य आकार के|

शिवरात्रि पर सच्चा उपवास यही है कि हम परमात्मा शिव से बुद्ध‍ि योग लगाकर उनके समीप रहे| उपवास का अर्थ ही है समीप रहना| जागरण का सच्चा अर्थ भी काम, क्रोध आदि पांच विकारों के वशीभूत होकर अज्ञान रूपी कुम्भकरण की निद्रा में सो जाने से स्वयं को सदा बचाए रखना है|

वास्तव में शिवरात्रि का परम पर्व स्वयं परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की याद दिलाता है| ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्री-पुरुष, बालक, युवा और वृद्ध सभी इस व्रत को कर सकते हैं. इस व्रत के विधान में सवेरे स्नानादि से निवृत्त होकर उपवास रखा जाता है|

Leave a Reply