त्यौहार

मां खोड़ियार जयंती

मां खोड़ियार जन्म कथा

Maa Khodiyar
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मां खोड़ियार जयंती, मां खोड़ियार जन्म कथा, मां खोडियर के प्रकट होने के बारे में कई किंवदंतियां प्रचलित हैं। सौराष्ट्र, सौराष्ट्र में वल्लभीपुर (वर्तमान वन्थली) में; कहा जाता है कि वर्ष ८६७ में खांडियार का जन्म हुआ था।

सोरठ गिर के नेस में रहने वाले मामद नाम के एक युवक ने मीणबाई नाम की एक उव्ती से शादी की। उसके बाद मामाद ने वल्लभीपुर और सोरठ को छोड़ दिया और काठियावाड़ सूबा के रोहिशाला गाँव (बोटाद के पास) में बस गए। तब सात नागकन्याएं और एक नागपुत्र का जन्म हुआ|

जिनमें से सातवीं बेटी जनाबाई का जन्म महासूद की आठवीं को हुआ था। मामद की सबसे छोटी बेटी जानबाई लोकदेवी मा खडियार हैं। जानबाई के बाद आठवें बच्चे के रूप में एक बेटा पैदा हुआ।

मूळ नाम : जानबाइ

शस्त्र : त्रिशुल

वाहन : मगर

प्रसाद : लापसी

जन्म तारीख: महाशुद आठम समय ( अषाठी बिज केटलीक आवृत्तिओ मुजब) : इ.स ७००

जन्म स्थळ: रोहितशाळा (नजीक वलभीपुर नजीक भावनगर गुजरात , भारत)

माता : मीनळदे गढवी

पिता: मामणिया गढवी

मैं देवी पुत्र कवि,ज्ञान की छविकलम का वारण हूँ, मैं चारण हूँ |

मैं देवी पग का दास,दिव्य नर खासशारदे धारण हूँ मैं चारण हूँ |

मैं तलवारों की धार,शब्द की मारकायरता मारण हूँ, मैं चारण हूँ |

मैं वेदों का शब्द,काव्य प्रारब्धजङता सँहारण हूँ, मैं चारण हूँ |

मैं इतिहासों का शाख्य,राज चाणक्यनीति निर्धारण हूँ, मैं चारण हूँ |

मैं कन्या पूजित वर्ण,विध्व परिपूर्णपवित्र अवधारण हूँ, मैं चारण हूँ |

मैं आदिमता का सँगी,आधुनिक श्रंगीप्रगति सँचारण हूँ, मैं चारण हूँ ।

मैं प्रखर वाणी प्रवीण,लोलुपता क्षीणस्वच्छंद उच्चारण हूँ, मैं चारण हूँ |

मैं सत्याग्रह का जनक,सत्य का फलककृत्य असाधारण हूँ, मैं चारण हूँ |

-कवि वरूण सिंह बाड़ी

बहु बेटी रे कारणे, जीवन मरण विचार ।

इज्जत इधिको आदरे , चहके चारणचार ॥1॥

सत राखे सत में रहे, सत हो सत व्यवहार ।

सत जीणो मरणो पड़े जिन्दो चारणचार ॥2॥

नित उठ निरखे टीपणो, कर्म मर्म आधार ।

विद्या धन धीरज धरम, चारण चारणचार ॥3॥

नशे सूँ नफरत करे , सादा खान विचार ।

लालच मन गफलत नहीं, जीते चारणचार ॥4॥

सांई साची प्रित हो , अधरम पर नित वार ।

चारण कव चुके नहीं , सब हित चारणचार ॥5॥

चार वर्ण चारण नही, सब पोथी इक सार ।

सफल कर्म अकल धरम , ना लोपे चारणचार ॥6॥

कुँवर# सा मेवाड़#!” जय माता दी

‘ ज ‘ केता जीवन सुधरे,

‘ य ‘ केता अवनी सुख मळे,

‘ खो ‘ केता माँ खडी थाय,

‘ डी ‘ केता दळदळ जाय,

‘ या ‘ केता माँ आवी मळे,

‘ र ‘ केता रिद्धि सिद्धि मळे,

‘ माँ ‘ केता मरण टाळे,

‘ जय ‘ केता जयकार थाय,

‘ खोडियार ‘ केता संकट जाय.

…….जय खोडियार माँ……

Chaaroo
the authorChaaroo

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