त्यौहार

लट्‌ठमार होली

लट्‌ठमार होली के रंग में डूबा पूरा ब्रज

Laththamar Holi
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लट्‌ठमार होली, लट्‌ठमार होली के रंग में डूबा पूरा ब्रज, मथुरा में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन लट्ठमार होली (Lathmar Holi) खेली जाती है| जो कि इस बार 16 मार्च को है| राधारानी की नगरी बरसाने में विश्वप्रसिद्ध लट्‌ठमार होली को देखने देश-विदेश से पर्यटक आए। श्रद्धालु और विदेशी सैलानी बरसाना में चारों ओर उड़ रहे गुलाल के बादलों और होली गीतों पर खुद को थिरकने से नहीं रोक पाए।

इस दिन नंदगांव के लड़के या आदमी यानी ग्वाला बरसाना जाकर होली खेलते हैं. वहीं, अगले दिन यानी दशमी पर बरसाने की ग्वाले नंदगांव में होली खेलने पहुंचते हैं. ये होली बड़े ही प्यार के साथ बिना किसी को नुकसान पहुंचाए खेली जाती है. सभी गोपिया चटख रंग का लहंगा-ओढ़नी पहन सोलह श्रृंगार करके लंबा घूंघट काढ़े होरियारियों को होरियारों ने छेड़ना शुरू किया तो होरियारियों ने लाठियों की बरसात शुरू कर दी। फिर हंसी-ठिठोली के बीच शुरू हो गई बरसाना की विश्व प्रसिद्ध होली। दोपहर को भगवान श्रीकृष्णरूपी ध्वजा को लेकर नंदगांव के होरियारे बरसाना स्थित पीलीपोखर पहुंचते है। इस पर बरसाना के गोस्वामी समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत करते है।

इसके बाद होरियारों ने भांग और ठंडाई का स्वाद चखने के बाद अपने-अपने सिरों पर साफा बांधा और श्रीजी मंदिर के लिए निकल पड़े। बरसाना की गलियों से निकलने के दौरान होरियारों पर जमकर गुलाल और रंग डालते है| खूब गाए रसियाछतों पर जहां भी बरसाना की गोपी खड़ी दिखी उसे नंदगांव के ग्वालों ने छेड़ना शुरू करते है। साथ ही रसिया गाकर उन्हें रिझाने की कोशिश भी करते है। रंगीली चौक पर पहले से खड़ी होरियारिनों को जब रसिया गाकर होरियारों ने छेड़ना और रिझाना शुरू किया तो होरियारिनों ने उन पर जमकर लट्‌ठ बरसाए। श्रीराधाकृष्ण की भक्ति में लीन दिखेघुटनों के बल बैठकर होरियारे ढाल पर लाठियों की मार से खुद को बचा रहे थे।

इस अनोखी होली को देख बाहर से आए श्रद्धालु होली के रंग में सराबोर होकर भगवान श्रीराधाकृष्ण की भक्ति में लीन दिखे।पुरुषों को कहते हैं हुरियारेलट्ठमार होली के दिन नंदगांव के ग्वालबाल होली खेलने के लिए राधा रानी के गांव बरसाने जाते हैं और बरसाना गांव के लोग नंदगांव में जाते हैं। इन पुरुषों को हुरियारे कहते हैं। बरसाना की ओर से होली खेलने का न्योता मिलने के बाद शुक्रवार को नंदगांव से चलकर कृष्णरूपी ग्वाल-बाल साफा और बगलबंदी पहनकर हाथों में ढाल लिए होली खेलने के लिए बरसाना पहुंचते है| इसे कहते लठ्ठमार होली|

लठ्ठमार होली

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