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जानिए क्या धारा ३७०

जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को देती है विशेष अधिकार

Section 370
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जानिए क्या धारा ३७०, जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को देती है विशेष अधिकार और जम्मू-कश्मीर राज्य को स्वायत्तता का दर्जा देता है। भारत से किस तरह अलग है। जम्मू-कश्मीर भारत से किस तरह अलग है। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव २०१९ के घोषणा पत्र रिलीज होते ही एक बार फिर से जम्‍मू कश्‍मीर में लागू धारा ३७० पर बहस छिड़ गई है। उसी तरह बीजेपी ने लोकसभा चुनाव २०१९ के घोषणा पत्र कहा था की वो जम्मू-कश्मीर में ३५ए को हटा देंगे|

भारत स्वतंत्रता के बाद छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ शामिल किया गया। जम्मू-कश्मीर को भारत के संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के ‍पहले ही पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने उस पर आक्रमण कर दिया। उस समय कश्मीर के राजा हरि सिंह कश्मीर के राजा थे। उन्होंने कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव काफी देर से रखा। तब इतना समय नहीं था कि कश्मीर का भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके।

स्वतंत्रता के समय जम्मू कश्मीर भारत के गणराज्य में शामिल नहीं था, लेकिन उसके सामने तो विकल्प थे वह या तो भारत या फिर पाकिस्तान में शामिल हो जाए। उस समय कश्मीर की मुस्लिम बहुल जनसंख्‍या पाकिस्तान से मिलना चाहती थी लेकिन राज्य के अंतिम महाराजा हरिसिंह का झुकाव भारत के प्रति था। हालात को देखते हुए गोपालस्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में धारा ३०६-ए, जो बाद में धारा ३७० बनी, का प्रारूप प्रस्तुत किया। इस तरह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिल गए।

धारा 370 है क्या? विशेष राज्य कश्मीर में लागू है।

१. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है।

२. जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है।

३. जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल ६ वर्षों का होता है जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल ५ वर्ष का होता है।

४. जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है।

५. भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं।

६. भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यंत सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है।

७. जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी। इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू – कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी।

८. धारा ३७० की वजह से कश्मीर में आरटीआई लागू नहीं है, आरटीई लागू नहीं है। सीएजी लागू नहीं होता। भारत का कोई भी कानून लागू नहीं होता।

९. कश्मीर में महिलावो पर शरियत कानून लागू है।

१०. कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं।

११. कश्मीर में चपरासी को २५०० ही मिलते है।

१२. कश्मीर में अल्पसंख्यको [ हिन्दू- सिख ] को १६% आरक्षण नहीं मिलता।

१३. धारा ३७० की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते है।

१४. धारा ३७० की वजह से ही पाकिस्तानियो को भी भारतीय नागरीकता मिल जाता है। इसके लिए पाकिस्तानियो को केवल किसी कश्मीरी लड़की से शादी करनी होती है।

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