त्यौहार

जगन्नाथ मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है

भगवान जगन्नाथ के मंदिर में कई अदभुत और विस्मयकारी रहस्यों है

Jagannath Temple Mysteries
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जगन्नाथ मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है, भगवान जगन्नाथ के मंदिर में कई अदभुत और विस्मयकारी रहस्यों का समावेश है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा यात्रा पर निकलते हैं। यह ओडिशा के मशहूर उत्सव में से एक है।

एक बार माता देवकी, योशोदा और बहन सुभद्रा द्वारका घुमने आए। सभी महल में बैठे थे तभी बाकि रानियों ने माता से कहा कि वह श्रीकृष्ण और बलराम की बच्चपन की लीलाओं के बारे में बताएं। माता यशोदा ने कहा कि वह बातें तो बताएंगी लेकिन सुभद्रा को दरवाजे पर रखवाली करनी होगी ताकि उनकी लीलाओं के बारे में श्रीकृष्ण और बलराम न सुन पाएं।

सुभद्रा दरवाजे पर रखवाली करते हुए लीलाओं के बारे में सुनने लगी। माता श्रीकृष्ण की लीलाओं का जिक्र करती जा रही थीं और सुभद्रा उन लीलाओं में इतनी खो गईं की श्रीकृष्ण और बलराम वहां आ गए और उन्हें पता ही नहीं चला। माता उनकी लीलाएं बताती गई और भगवान सारी लीलाओं को सुनकर मनमोहित होते रहे।

इस बीच अचानक से नारद मुनि अवतरित हुए और प्रभु की मनमोहित छवि देख कर खुद को रोक न सके और उनसे पूछा कि वह अपने इस मनमोहित छवि का अवतार कब होगा। इतना सुन कर सभी की ध्यान भंग हुआ और माता ने देखा कि श्रीकृष्ण वही मौजूद हैं सुभद्रा मनमेहित हो गई हैं। लीलाओं कि कथा यही रुक गई और तब भगवान ने कहा कि लीलाएं अधूरी रह गई लेकिन वह कलयुग में जरूर अवतार लेंगे।

मंदिर के शिखर पर स्थापित ध्वजा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराती रहती है। हवाओं की रफ्तार कैसी भी हो ध्वजा का रुख हमेशा उसके विपरीत ही होता है।

यहाँ रसोई की एक और खासियत यह है कि प्रसाद पकाने के लिये ७ बर्तनों को एक दूसरे के ऊपर रखा जाता है और प्रसाद पकने की प्रक्रिया सबसे ऊपर वाले बर्तन से प्रारंभ होती है। मिट्टी के बर्तनों में लकड़ी पर महाप्रसाद तैयार किया जाता है सबसे नीचे वाले बर्तन का प्रसाद आखिर में पकता है। हैरानी की बात यह है कि मंदिर के द्वार बंद होते हैं प्रसाद भी समाप्त हो जाता है।

इस मंदिर के ऊपर से कभी भी पक्षी अपनी उड़ान भरते हुए नहीं गुजरते हैं।

भगवान जगन्नाथ के मंदिर के ऊपरी हिस्से की परछाई दिन में किसी भी समय नजर नहीं आती है।

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