त्यौहार

जगन्नाथ रथ यात्रा २०१९

अषाढ़ी बीज २०१९

Jagannath Rath Yatra 2019
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जगन्नाथ रथ यात्रा २०१९, अषाढ़ी बीज २०१९, भगवान जगन्नाथ के स्मरण में निकाली जाने वाली रथ यात्रा का हिन्दू धर्म में बड़ा ही पावन महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, पुरी यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। कहते हैं कि इस यात्रा के माध्यम से भगवान जगन्नाथ साल में एक बार प्रसिद्ध गुंडिचा माता के मंदिर में जाते हैं। इस पावन यात्रा में भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर निकलते हैं।

दरअसल मान्यता है कि ज्‍येष्‍ठ मास की पूर्णिमा से अमावस्‍या तक भगवान जगन्नाथजी बीमार रहते हैं और इन १५ दिनों में इनका उपचार शिशु की भांति चलता है जिसे अंसारा कहते हैं। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को भगवान स्वस्थ हो जाते हैं और द्वितीया तिथि को गुंडीचा मंदिर तक भगवान की रथ यात्रा निकलती है। आदि गुरु शंकराचार्य के निर्देशानुसार एक हिंदू को अपने जीवन काल में चार धाम यात्रा अवश्य करनी चाहिए। जगन्नाथ पुरी मंदिर इन चार तीर्थस्थलों में से एक है।

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को ओडिशा के पुरी नामक स्थान और गुजरात के द्वारका पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा बड़ी धूमधाम से निकाली जाती है। पुरी में श्री जगदीश भगवान को सपरिवार विशाल रथ पर आरुढ़ कराकर भ्रमण करवाया जाता है फिर वापस लौटने पर यथास्थान स्थापित किया जाता है।

भगवद भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और उत्सव मनाते हैं। पुरी में जिस रथ पर भगवान की सवारी चलती है वह विशाल एवं अद्वितीय है। वह ४५ फुट ऊंचा, ३५ फुट लंबा तथा इतना ही चौड़ाई वाला होता है। इसमें सात फुट व्यास के १६ पहिये होते हैं। इसी तरह बालभद्र जी का रथ ४४ फुट ऊंचा, १२ पहियों वाला तथा सुभद्रा जी का रथ ४३ फुट ऊंचा होता है। इनके रथ में भी १२ पहिये होते हैं। प्रतिवर्ष नए रथों का निर्माण किया जाता है।

भगवान  जगन्नाथ के रथ को  ‘गरुड़ध्वज’ अथवा ‘कपिल ध्वज’ भी कहा जाता है। लाल और पीले रंग के इस रथ की रक्षा विष्णु का वाहक गरुड़ करते हैं। इस रथ पर एक ध्वज भी स्थापित किया जाता है जिसे ‘त्रिलोक्य वाहिनी’ कहा जाता है। प्रभु बलभद्र के रथ को ‘तलध्वज’ कहते है और यह लाल और हरे रंग के कपडे और ७६३ लकड़ी के टुकड़ों से बना होता है। देवी सुभद्रा की प्रतिमा ‘पद्मध्वज’ नामक रथ में विराजमान होती है जो लाल और काले कपडे और लकड़ियों के ५९३ टुकड़ों से बनाया जाता है।

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