त्यौहार

महाशिवरात्रि का महत्व

शिवरात्रि का महत्व

Bhagwan Shiva
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महाशिवरात्रि का महत्व, शिवरात्रि का महत्व, फाल्गुन मास के दिन आने वाली महाशिवरात्रि पर शिव जी और मां पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिये इस पर्व को महाशिवरात्रि कहते हैं। जिनके तीनों नेत्रों से उत्सर्जित होने वाली तीन अग्नि जीव मात्र का शरीर पोषण करती हैं, जिनके त्रैराशिक तत्वों से जगत को त्रिरूप यानी आकार, प्रकार और विकार प्राप्त होता है, जिनका त्रिविग्रह त्रिलोक को त्रिविध रूप से नष्ट करता है, ऐसे त्रिवेद रूपी भगवान शिव मधुमास पूर्वा प्रदोषपरा त्रयोदशी तिथि को प्रसन्न हों|

इस दिन शिव जी की पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है। शिव जी पर एक लोटा जल चढ़ाने से ही भगवान इंसान की मुराद पूरी कर देते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार भगवान शिव पर पूजा करते वक्‍त बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से जलाभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने भर से ही आपका बेड़ा पार हो जाएगा।

भगवान शिव के भक्‍तों के लिए महाशिवरात्रि बड़ी ही महत्‍वपूर्ण होती है। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में भक्‍तों की भींड लगी रहती है। इस साल शिवरात्रि कब पड़ेगी यह विचार काफी लोगों के मन में है। वैसे तो शिवरात्रि हर माह आती है मगर फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि कुछ ज्‍यादा ही खास होती है।

महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है| महाशिवरात्रि के दिन शिवभक्त बड़े धूमधाम से शिव की पूजा करते हैं| भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर बेल-पत्र आदि चढ़ाकर पूजन करते हैं| लोग उपवास तथा रात को जागरण करते हैं| शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास तथा रात्रि जागरण करना एक विशेष कर्म की ओर इशारा करता है| यह माना जाता है कि इस दिन शिव का विवाह हुआ था, इसलिए रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है|

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