धर्म

राधा की मृत्यु कैसे हुई थी

श्रीकृष्ण ने बांसुरी क्यों तोड़ दी थी

Radhe Krishna
433

राधा की मृत्यु कैसे हुई थी, श्रीकृष्ण ने बांसुरी क्यों तोड़ दी थी, जानें राधा-कृष्ण की सच्ची प्रेम कहानी और अनोखा रहस्य| जब भी प्रेम की मिसाल दी जाती है तो श्रीकृष्ण-राधा के प्रेम की मिसाल सबसे पहले आती है| राधे-श्याम… ये दो शब्द अटूट प्रेम का हिस्सा माने जाते हैं| राधा-श्रीकृष्ण के प्रेम को जीवात्मा और परमात्मा का मिलन कहा जाता है| भले ही एक दूसरे के कभी हो नहीं सके लेकिन फिर भी एक दूसरे के साथ ही हमेशा नाम लिया गया|

राधा श्रीकृष्ण का बचपन का प्यार थीं| कृष्ण के जन्म, राधा के जन्म, उनकी दोस्ती की कहानियां तो बहुत प्रचलित हैं| उन्होंने जिंदगी भर अपने मन में प्रेम की स्मृतियों को बनाए रखा| पहली बार कृष्ण राधा से दूर तब गए, जब जब मामा कंस ने उन्हें और बलराम को मथुरा आमंत्रित किया। वृंदावन के लोगों को जब यह बात पता चली, तो वह दुःखी हो गए। यही उनके रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती है| ये प्रेम कहानी समजने से अच्छा है प्रेम को कैसे निभाना चाहिए|

गर्ग संहिता में राधा और कृष्ण की लीलाओं के बारे में बताया गया है| राधा-कृष्ण के प्रेम के बारे में बताया गया है| शास्त्रों में वर्णित है कि राधा जी को कान्हा की नगरी द्वारिका में कोई नहीं जानता था। राधा के अनुरोध पर कृष्ण ने उन्हें महल में एक देविका के रूप में नियुक्त किया। वे दिन भर महल में रहतीं, महल से जुड़े कार्यों को देखती और जब भी मौका मिलता दूर से ही कृष्ण के दर्शन कर लेती थीं।

कहा जाता है कि श्रीकृष्ण को केवल दो ही चीजें सबसे ज्यादा प्रिय थीं| ये दोनों चीजें भी आपस में एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई थीं- बांसुरी और राधा| जब कृष्ण रुकमणी के पास गए और उनसे शादी कर ली| कृष्ण ने वृंदावन छोड़ दिया तभी राधा और कृष्ण आखिरी बार मिले थे| जब कृष्ण वृंदावन से निकल गए तब राधा की जिंदगी ने अलग ही मोड़ ले लिया था| राधा की शादी एक यादव से हो गई| राधा के पति का वर्णन ब्रह्मावैवर्त पुराण में किया गया है| राधा ने पत्नी के तौर पर अपने सारे कर्तव्य पूरे किए. दूसरी तरफ श्रीकृष्ण ने अपने दैवीय कर्तव्य निभाए|

भले ही श्रीकृष्ण और राधा का मिलन नहीं हो सका लेकिन उनकी बांसुरी उन्हें हमेशा एक सूत्र में बांधे रही| राधा अपने जीवन के अंतिम दिनों में राधा ने अपना घर छोड़ दिया था और कृष्ण से मिलने द्वारका चली गईं थीं| राधा और कृष्ण जब आखिरी बार मिले थे तो राधा ने कृष्ण से कहा था कि भले ही वो उनसे दूर जा रहे हैं, लेकिन मन से कृष्ण हमेशा उनके साथ ही रहेंगे|

जब राधा द्वारिका छोड़ देती है तब उन्होंने सोचा कि वह दूर जाकर दोबारा श्रीकृष्ण के साथ गहरा आत्मीय संबंध स्थापित कर पाएंगी| जब वो अकेली और कमजोर हो गईं| उस वक्त उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की आवश्यकता पड़ी. आखिरी समय में भगवान श्रीकृष्ण उनके सामने आ गए| कान्हा ने राधा से पूछा, ‘वे इस अंतिम समय में कुछ मांगना चाहें।’ तब राधा ने एक ही मांग की और वह यह कि ‘वे आखिरी बार कृष्ण को बांसुरी बजाते देखना चाहती थी’। कृष्ण ने बांसुरी ली और बेहद मधुर धुन में उसे बजाया, बांसुरी के मधुर स्वर सुनते-सुनते राधा जी ने अपना शरीर त्याग दिया। कहते हैं कृष्ण ने इस घटना के बाद अपनी बांसुरी तोड़ दी और फिर कभी वह बांसुरी नहीं बजाई जिसकी तान सुन राधाजी देवलोक की ओर चली गई थीं।

Leave a Reply