त्यौहार

होली कविता

होलिका दहन कविता

Holi Pictures
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होली कविता, होलिका दहन कविता, होली का पर्व साल में आने वाले सबसे बड़े त्योहारों में से एक है जिसे केवल भारत में ही नहीं बल्कि दूर देशों में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। क्या बच्चे, क्या बड़े, क्या महिलाएं और क्या पुरुष सभी इस पर्व का भरपूर आनंद उठाते हैं। इसीलिए तो इसे आनंद और उल्लास का पर्व भी कहा जाता है। लाल, पीले, हरे, गुलाबी आदि रंगों से रंगे गाल माहौल को और खुशनुमा बना देते है।

बहुत से लोग होली के दिन ही अपनी पुरानी दुश्मनी भुलाकर दोस्तों को होली मुबारक करते हैं। सांस्कृतिक रूप से होली ऐसा पर्व है जिसे मनाने वालों में कोई भिन्नता नहीं होती सभी एक ही रंग में रंगे एक दूसरे के साथ ख़ुशी के इस पर्व का आनंद उठाते हैं। लेकिन सांस्कृतिक महत्व होने के साथ-साथ होली का धार्मिक रूप से भी बहुत अधिक महत्व है।


सुबह रंगीली शाम रंगीली

ऐसी आयी है ये होली

सब पर बरसे रंग कई

पर मेरी खाली थी झोली


दिन रंगीन, रंगीली रात

दिल में रह गयी दिल की बात

कैसे सह पाऊ मैं पगली

मिले जो मुझको कई आघात


जब भी आती देखी होली

रात अँधेरी मुझको बोली

सुबह के रंग में रंग दूंगी तुझको

पर सुबह ने आँख न खोली


होली आयी और चली गयी,

सब की दुनिया रंगी गयी

मैं मासूम लिए दिल अपना

जाने कितनी बार चली गयी


रंग में उमंग नहीं थी

खुशियो की कोई भांग नहीं थी

ऐसी थी तक़दीर मेरी की,

होली की कोई हुड़ंग नही थी

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