धर्म

४० साल में एक बार जल समाधि से निकलते हैं भगवान अति वरदार

४८ दिन तक भक्तो को दर्शन देते है भगवान अति वरदार

Athi Varadar
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४० साल में एक बार जल समाधि से निकलते हैं भगवान अति वरदार, ४८ दिन तक भक्तो को दर्शन देते है भगवान अति वरदार| तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थिति है अति वरदर भगवानका मंदिर| इस मंदिर का नाम है भगवान वरदराजा स्वामी मंदिर। यहां भगवान अती वरदार की मूर्ति भक्तों को दर्शन देने के लिए ४० साल में एक बार कुछ दिनों के लिए जल समाधि से बाहर निकलती है।

जब बुधवार को जब भगवान अति वरदार की मूर्ति को पवित्र तालाब से बाहर निकाला गया, वहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। भगवान अति वरदार की मूर्ति को पवित्र तालाब से बाहर निकालने के बाद दर्शन के लिए मंदिर के वसंत मंडपम में रखा जाता है।

यहां तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित संग मंदिर के पुजारियों की मौजूदगी में हजारों श्रद्धालुओं ने उनकी पूजा-अर्चना की। मूर्ति के शुरूआती दर्शन करने वालों में राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित भी शामिल रहे। इस दौरान मूर्ति को फूल-माला के साथ भव्य यात्रा निकालकर मंदिर के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया गया।

भारत में जितनी विविधता है, उनते ही मान्यताएं और रीति-रिवाज भी। इस अनोखे मंदिर में लोगों की अपार श्रद्धा है। यही वजह है कि भगवान अति वरदार भले ही 40 वर्ष तक जल समाधि में रहते है| इससे पहले वर्ष १९७९ में भगवान अति वरदान ने मंदिर के पवित्र तालाब से बाहर आकर भक्तों को दर्शन दिए थे। यहा दर्शनों के लिए देशी-विदेशी भक्तों का हुजुम उमड़ पड़ता है।

भगवान अति वरदार मंदिर के पवित्र तालाब में ४० साल लंबी जल समाधि क्यों लेते हैं और दर्शन देने के लिए ४८ दिन तक ही बाहर क्यों निकलते हैं, इसका किसी के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। हालांकि, इसे लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। पहली कहानी ये है कि वर्षों पहले मंदिर के एक पुजारी को भगवान ने नींद में दर्शन दिए और उनसे कहा कि उन्हें पानी में डाल दिया जाए। दूसरी कहानी ये है कि इस मूर्ति को उस वक्त बनाया गया था, जब मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मूर्ति को पानी में डाल दिया गया था। भगवान अति वरदार की मुर्ति अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी हुई है।

४० साल में एक बार होने वाले भगवान अति वरदार के दर्शन के दौरान भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन की तरफ से खास व्यवस्था की गई है। बहुत ज्यादा भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से मंदिर में सुरक्षित प्रवेश और निकास की व्यवस्था की गई है।

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