त्यौहार

बसंत पंचमी, जानिए पूजा-विधि, मंत्र और महत्व

बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त

Basant Panchami
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उत्तर भारत के कई राज्यों में श्री पंचमी, वसंत पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से जानी जाने वाली ये पंचमी ९ फरवरी को भी मनाई जाएगी| बसंत पंचमी १० फरवरी को मनाई जा रही है| बसंत पंचमी के दिन प्रयागराज में चल रहे कुंभ में शाही स्नान भी होगा|

प्राचीन परम्पराओं के अनुसार, मंदिरों में होली की तैयारियों के साथ ही आम समाज में भी होली का आगाज़ हो जाता है. फाल्गुन शुक्ल पूर्णमासी की रात होली जलाए जाने वाले चौराहों पर डांढ़ा गाड़ दिया जाता है जो इस बात का प्रतीक होता है कि ब्रज में अब होली के पारम्परिक आयोजन शुरु हो गए हैं|

सरस्वती वंदना-

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला

या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा

या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

सरस्वती वंदना गीत-

वर दे, वीणावादिनि वर दे !

प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव

भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर

बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;

कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर

जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव

नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;

नव नभ के नव विहग-वृंद को

नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे।

मां सरस्वती की आरती

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।

सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय..

चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी।

सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥ ॐ जय..

बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला।

शीश मुकुट मणी सोहें, गल मोतियन माला ॥ ॐ जय..

देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया।

पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥ ॐ जय..

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।

मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो ॥ ॐ जय..

धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो।

ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥ ॐ जय..

मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें।

हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें ॥ ॐ जय..

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।

सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय..

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ।

सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय..

साध्य योग

साध्य योग रविवार को दिन 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगा, उसके बाद शुभ योग लग जाएगा। साध्य योग भविष्य में अच्छी सम्भावनाओं की ओर संकेत करने वाला योग है और पूर्ण शुभ फल प्रदान करता है।

बसंत पंचमी पूजा का मुहूर्त

कुंभ स्थिर लग्न दिन में 6:39 से 8:10 बजे तक,

वृष स्थिर लग्न दिन में 11:15 से दोपहर 1:11 बजे तक,

सिंह लग्न रात्रि 5:43 से 8:06 बजे तक विद्यमान रहेगा।

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