त्यौहार

आमलकी एकादशी के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग

मोक्ष प्राप्ति, एक हजार गौ दान का मिलता है फल

Amla Ekadashi
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आमलकी एकादशी के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग, मोक्ष प्राप्ति, एक हजार गौ दान का मिलता है फल, व्रत विधि आरती एवं प्रामाणिक व्रत कथा| फाल्गुन शुभ मास की शुक्ल एकादशी रविवार को पड़ी है| इसे आंवला एकादशी के रूप में मनाते हैं| शुभ पुष्य नक्षत्र भी है| व्रत करके पूजा पाठ करने से विष्णु और लक्ष्मी जी का महावरदान मिलता है| ग्रह नक्षत्रों का अद्भूत संयोग बना है| रविवार का स्वामी सूर्य विष्णु देव का कारक है| यह योग बुद्धि, विद्या और धन देता है| आंवले के वृक्ष या आंवले की ढेर और विष्णु लक्ष्मी की पूजा करेंगे| आपके बच्चों को उच्च शिक्षा मिलेगी|

आमलकी एकादशी व्रत का महत्त्व

पद्म पुराण के अनुसार आमलकी एकादशी व्रत करने से तीर्थ स्थानों जितना पुण्य फल मिलता है| सभी यज्ञों के बराबर फल देने वाले इस आमलकी एकादशी व्रत को करने से व्यक्ति मोक्ष प्राप्त करता है तथा मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के धाम में जाता है।

कैसे करें आमलकी एकादशी पर व्रत-पूजन

एक समय फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी आई। उस दिन राजा, प्रजा तथा बाल-वृद्ध सबने हर्षपूर्वक व्रत किया। राजा अपनी प्रजा के साथ मंदिर में जाकर पूर्ण कुंभ स्थापित करके धूप, दीप, नैवेद्य, पंचरत्न आदि से धात्री (आंवले) का पूजन करने लगे और इस प्रकार स्तुति करने लगे|

इस दिन सभी आंवले के पेड़ के साथ भगवान विष्णु जी की पूजा करते हैं और इसी दिन रंगभरनी एकादशी भी मनाई जाती है, जिसमें भगवान शिव को रंग लगाकर होली की तैयारियों की शुरुआत करते हैं। बता दें कि इस कारण से यह दिन शिव और विष्णु भक्तों दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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