धर्म

अहोई अष्टमी व्रत की पूजन विधि और कथा

संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए किया जाता है अहोई अष्टमी का व्रत

Ahoi AshtamiAhoi Ashtami
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इस बार ये पर्व ३१ अक्टूबर, २०१८ यानि बुधवार को है। ज्योतिषीयों के अनुसार इस बार शनिवार दोपहर एक बजकर ११ मिनट पर सप्तमी समाप्त होगी और उसके बाद अष्टमी रहेगी। रविवार की दोपहर ११ बजकर २९ मिनट तक रहेगी। इस दिन मां अपने बच्चों की लंबी उम्र और उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती है।

स्याहु अपने सात बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी की चोट से स्याहू का एक बच्चा मर गया। स्याहू इस पर क्रोधित हुई और उसने साहूकार की बेटी की कोख बांध दी। तब पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह उसे दी। सुरही उसकी सेवा से प्रसन्न हो जाती है और उसे स्याहु के पास ले जाने के लिए वो निकल पड़ते हैं। अचानक बहू देखती है कि एक सांप गरुड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। गरुड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है। वहां स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का अशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहू का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा-भरा हो जाता है।

अहोई अष्टमी आरती

जय अहोई माता, जय अहोई माता!

तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता। टेक।।

ब्राहमणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता।

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।। जय।।

माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता।।

जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता।। जय।।

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।

कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।। जय।।

जिस घर थारो वासा वाहि में गुण आता।।

कर न सके सोई कर ले मन नहीं धड़काता।। जय।।

तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता।

खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता।। जय।।

शुभ गुण सुंदर युक्ता क्षीर निधि जाता।

रतन चतुर्दश तोकू कोई नहीं पाता।। जय।।

श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता।

उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता।।

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